वीचि ६

अचलेश सिंह

वीचि ६
(38)
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सारांश

गतांक से आगे•••••••• निर्वेद की आंखों ने जब सामने देखा तो उसे सहसा यकीन न हुआ ।      उसने आंखों को भींचकर फिर से देखा यह सच था।उनके सम्मुख एक यौवना सफेद कपडों में खड़ी थी।        उसके भारी भरकम ...
Akashkumar saini
bahut romanchkari lgi h.thank you
MAMTA SHARMA
entrusting store sir
Dr. Santosh Chahar
आपकी कल्पना शक्ति अद्भुत है।
Rishabh Shukla
बहुत सुंदर कहानी
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Ashish Vashisth
bht hi behtarin or rahsayama rachna..
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दीपा
bht rahasyamayi
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Ravi Kashyap Rajandar Kashysp
ati uttam
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