विश्वास

कविता वर्मा

विश्वास
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सारांश

बहुत घनी काली अँधेरी रात थी हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था आसमान में घने काले बादल छाये थे बहुत तेज़ हवाएँ चल रहीं थीं। दूर दूर तक अँधेरा सपाट मैदान था उनमें इक्का दुक्का पेड़ भयानक लग रहे थे। कच्ची सड़क की ...
Deepak Valvani
aapki kahani bohot achhi hae, kahani or aage badatin to or maza aata."D"
k n tripathi
very nice
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Jatin Kant Singh
Good
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Anuradha Verma
nice
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Usha Garg
कभी कभी सपने भी सच हो जाते है या कोई अनदेखी शक्ति
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Ravinder Kumar
Bahut badhiya
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you hu
लेखन अच्छा है लेकिन कहानी अधूरी सी लगी
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Amit Suryavanshi
बहोत शानदार..दोस्तों इमली का प्रेत भी पढें
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PriYanKa Pankhi
nice one
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