विमाता

मुंशी प्रेमचंद

विमाता
(202)
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सारांश

स्त्री की मृत्यु के तीन ही मास बाद पुनर्विवाह करना मृतात्मा के साथ ऐसा अन्याय और उसकी आत्मा पर ऐसा आघात है जो कदापि क्षम्य नहीं हो सकता। मैं यह कहूँगा कि उस स्वर्गवासिनी की मुझसे अंतिम प्रेरणा थी और ...
Sarita Dubey
वात्सल्य और करुणा से पूरित रचना
Aruna Garg
nishabd Hu. munshiji ki kahaniya bachpan se padti aai Mujhe bahut Pasand he.
अशोक कुमार खत्री
नारी वात्सल्य की अद्भुत छवि।
मंजुबाला
मार्मिक और वात्सल्य भरी
Rajeev Srivastava
दुख एवं वात्सल्य
Lalima Lalima
very nice, step mother after all is a mother
Pradeep Mishra
अद्भुत हृदयस्पर्शी रचना दिल को छू जाती है रचना पढ़ने के बाद आंखें गीली हो जाती है लेखक की अद्भुत प्रस्तुति ऐसे लेखक की लेखनी को शत कोटि नमन
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