विभीषण का देशप्रेम

Dr. Madhavi Srivastava

विभीषण का देशप्रेम
(17)
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सारांश

ऋषि मानस का भी आश्रम तहस-नहस कर दिया गया था, यज्ञ की वेदी तोड़ दी गई थी, आश्रम के बाग उजाड़ दिए गए थे, साधुओं को शारीरिक यातनाएं दी गई थी। ऋषि मानस अब अत्यधिक दु:खी हो गए थे। उनको समझ में नहीं आ रहा था कि किससे अपना दुखड़ा सुनाए। सौभाग्य से, उसी दिन विभीषण नगर भ्रमण पर निकले थे, ऋषि मानस को पता था कि कुमार विभीषण ईश्वर के सच्चे भक्त हैं, अतः उन्होंने कुमार विभीषण से अपने ऊपर हुए अत्याचार और लंका की जनता के साथ हो रहे अन्याय से अवगत कराया
Neha Sharma
उम्दा रचना। शुभकामनाएं आपको। कृपया मेरी रचना मन बावरा पर अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया देकर अनुगृहित करें।
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divyamishra
विभीषण के दृष्टिकोण को दिखाया गया अत्यंत सराहनीय
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मंजुबाला
धार्मिक ऐतिहासिक और पौराणिक विषय पर अच्छी पकड़ है आपकी
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Rahul Swarnkaar
गुड
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Abhilasha Chauhan
बहुत बढ़िया
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अनिल गर्ग
सराहनीय अति उत्तम
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Vaidehi Srivastava
अति सुन्दर
Maneesha
Bahut achche se prastut kiya hai
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