विद्रोही

मुंशी प्रेमचंद

विद्रोही
(81)
पाठक संख्या − 6712
पढ़िए

सारांश

आज दस साल से जब्त कर रहा हूँ। अपने इस नन्हे-से ह्रदय में अग्नि का दहकता हुआ कुण्ड छिपाये बैठा हूँ। संसार में कहीं शान्ति होगी, कहीं सैर-तमाशे होंगे, कहीं मनोरंजन की वस्तुएँ होंगी; मेरे लिए तो अब यही ...
Neelam Sah
मुंशी प्रेमचंद की रचनाएं अति उत्तम होती हैं, नाम ही काफी है। गांव की गँवईपन हो या प्रेम कहानियाँ पढ़ते समय यथार्थ की अनुभूति होती है।
Archana Soni
सुंदर रचना
manoj parharya
मुंशी प्रेमचन्द से अच्छा लेखक आज तक इस दुनिया में नहीं हुआ है और ना होगा
TABREZ ALAM
vakai gajab kahani hai
Vinod Sharma
कहानी पूरी होने के बाद मेरे मन मे कृष्ण बाबू के लिए एक ही गीत आया, मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया।
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.