विद्रोही

मुंशी प्रेमचंद

विद्रोही
(75)
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सारांश

आज दस साल से जब्त कर रहा हूँ। अपने इस नन्हे-से ह्रदय में अग्नि का दहकता हुआ कुण्ड छिपाये बैठा हूँ। संसार में कहीं शान्ति होगी, कहीं सैर-तमाशे होंगे, कहीं मनोरंजन की वस्तुएँ होंगी; मेरे लिए तो अब यही ...
Archana Soni
सुंदर रचना
manoj parharya
मुंशी प्रेमचन्द से अच्छा लेखक आज तक इस दुनिया में नहीं हुआ है और ना होगा
TABREZ ALAM
vakai gajab kahani hai
Vinod Sharma
कहानी पूरी होने के बाद मेरे मन मे कृष्ण बाबू के लिए एक ही गीत आया, मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया।
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