विदेश

Devendra Kumar Mishra

विदेश
(38)
पाठक संख्या − 1449
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सारांश

यह एक सामाजिक कहानी है। जिसमे दो मित्रों का वर्णन किया गया है। एक देश में रहकर पढाई करता है तो दूसरा विदेश में। पूरा समाज नाते रिस्तेदार विदेश में पढ़ने वाले को बहुत महत्व देता है।लेकिन देश मे पढाई कर रहा यह साबित कर देता है कि देश विदेश से भी बढ़कर है।
रमेश तिवारी
अति सुन्दर रचना ।। कृपया मेरी रचना श्री दुर्गा चरित मानस पढ़ने का कष्ट करे सहृदय धन्यवाद
dr.sonil
बहुत उम्दा सर
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Sunil Jaiswal
very nice 👌👌👌👌
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Versa Saxena
very nice
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'राज' पूर्णिमा
bahut hi umda likha hai aapne
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अभिलाषा चौहान
बहुत बढ़िया
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Pramod Ranjan Kukreti
बहुत अच्छा विषय चुना आपने । आपकी कहानी में समाज के लिए संदेश स्प्ष्ट है । बच्चे विदेश जाकर पढ़ना चाहें या नही पर माता पिता के लिए ये सामाजिक ऊंचे स्तर का प्रतीक हो गया है । एक अच्छी रचना ,यों ही लिखते रहिये ।
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डा० राजेश मिश्रा
एक सुन्दर रचना देवेन्द्र जी।
DINESH L. JAIHIND
बहुत अच्छी कहानी, तुलनात्मक विवरण |
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