।।विदाई।।

गोपाल यादव

।।विदाई।।
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पाठक संख्या − 464
पढ़िए

सारांश

एक बार जरूर पढ़ें एक बेटी और परिवार की विदाई के समय की विरह वेदना
Dipti Biswas
समीक्षा के लिए शब्द नहीं है मेरे पास वाकई अहसास एक है लेकिन कितनी खूबसूरती से आपने बयां किया बहुत खूब सर।
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Daisy
संवेदनशील रचना। बहुत खूब
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Anurag Chaturvedi
ATI sunder abhivykti ⭐ sir aap mujhe bhi pde aur ydi sambhav ho to apna bahumuly vichar aur samiksha bhi prdaan kre 😊
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प्रज्ञा शिवा
सुंदर अभिव्यक्ति....बेटी के बचपन से यौवन तक का सफर सुंदर शब्दों में उकेर दिया
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रघुराज सिंह
अति उत्तम रचना, ऐसे ही लिखते रहे बधाई हो 🙏🙏👌👍
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Dharm Pal Singh Rawat
भावुक कर दिया आपने।
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Sudhir Kumar Sharma
मार्मिक
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Rehan Aabid Ali Kazmi
वाह nice
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Indira Kumari
हृदय को छू लेने वाली कविता बहुत सुन्दर
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