विदाई

kanchan pandey

विदाई
(6)
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सारांश

काली मोतियों की माला में गुँथे सपने लेकर चली थी, मैं विदाई की सुबह नए अपने लेकर चली थी.. इतने बरस  बाबुल के प्यार को दिल मे संजोये, मायके की बगिया में प्रेम के बीज बोए.. एक बहु के दिल में माँ की ...
Neha Sharma
बेहतरीन प्रस्तुति।
Pawan Pandey
विदाई की बहुत ही अच्छी अभिव्यक्ति।
Om Shankar
कोशिश की नींव बहुधा मजबूत हुआ करती है ! साधुवाद!
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