विजया

राहुल देव

विजया
(540)
पाठक संख्या − 53354
पढ़िए

सारांश

ट्रिंग-ट्रिंग-ट्रिंग...घंटी बजे जा रही थी | सविता किचेन में थी | “उफ़ ! अभी तो उठाया था, अब कौन है |” यों बड़बड़ाती हुई वह दौड़कर फ़ोन तक आयी | सविता ने फ़ोन उठाया तो उधर रवि था, उसका पति | सविता झुंझलाहट ...
नैना साहू
बेहतरीन रचना
Lalita Vimee
बहुत ही उम्दा कहानी।।
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.