विजया

राहुल देव

विजया
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सारांश

ट्रिंग-ट्रिंग-ट्रिंग...घंटी बजे जा रही थी | सविता किचेन में थी | “उफ़ ! अभी तो उठाया था, अब कौन है |” यों बड़बड़ाती हुई वह दौड़कर फ़ोन तक आयी | सविता ने फ़ोन उठाया तो उधर रवि था, उसका पति | सविता झुंझलाहट ...
Nisha Singh
bhut sundar kahani hai
Soniya Shukla
manviya prem ka utkrasht udharan
shakun gautam
भावपूर्ण रचना
सुबोध चतुर्वेदी
मर्मस्पर्शी कहानी
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