विजया

राहुल देव

विजया
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सारांश

ट्रिंग-ट्रिंग-ट्रिंग...घंटी बजे जा रही थी | सविता किचेन में थी | “उफ़ ! अभी तो उठाया था, अब कौन है |” यों बड़बड़ाती हुई वह दौड़कर फ़ोन तक आयी | सविता ने फ़ोन उठाया तो उधर रवि था, उसका पति | सविता झुंझलाहट ...
neetu singh
भावपूर्ण रचना
Megha Srivastava
बहुत ही अच्छी कहानी। हृदय को छू लेने वाली
shubh
bahut badhiya.. Rahul ji.. main Bareilly se nahi janti thi ki aapme ye bhi pratibha hai...
राजेश सिन्हा
एक बेहतरीन और खूबसूरत कहानी ! मन को मोहने वाली
Aashu Jain
Very emotional story... 👌
Manu Prabhakar
दिल को छू गई आपकी रचना । मेरी कहानियाँ भी पढ़ें।
Anshul
bhot achi kahani h sir
Sohil Agaria
मेरी रचना ' रंजिश : दोस्ती की दास्तान ' जरूर पढ़िए
अरुण कुमार भट्ट
वाह सर जी, बहुत बढ़िया
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