विजयघोष

Kavi Kaushik

विजयघोष
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सारांश

सबक शत्रुओं को सीखा जायेंगे, दूर परदेशियों को भगा आयेंगे। जो निकली चूं गर मुख से उसके, काट जिह्वा मां भारती को चढ़ायेंगे। बेईमानों की अब एक न चलेंगे, उठा जो सर खिलाफ प्रत्येक वो कटेंगे। खादियो के खोल ...
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