विक्षिप्ता

Kumar durgesh Vikshipt *Vaishnav*

विक्षिप्ता
(28)
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सारांश

विक्षिप्ता कुमार दुर्गेश "विक्षिप्त" अदाऐं तुम कुछ गजब ढा़ रही हों..। मुझ में फिर से ख्वाब जगा रही हों.. अदाऐं तुम ..... पा सकू मंजिल में राहें दिखा रही हों.. अदाऐं तुम.... जी सकू इक नई शुरूआत ...
Ritvika Kashyap
gazab
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Hema Ingle
क्या बात ... एक ही line को अग तरिके से बताने का ढंग पसंद आया
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सरिता सन्धु
निसंदेह सुन्दर रचना
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Satpal. Singh Jattan
nice one
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Komal 💞
very nice
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Jaidev toksiya
Wah o nice
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योगेश
romantic
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Hanuman Bairwa
खूब...
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Naresh Gujjar
wah
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