वात्सल्य की बारिश

ब्रजेंद्रनाथ मिश्रा

वात्सल्य की बारिश
(99)
पाठक संख्या − 13250
पढ़िए

सारांश

यह एक ओर बूढ़े होते बाप और दूसरी ओर आई टी सेक्टर में काम करते बेटे और कामकाजी बहू के बीच के रिश्तों की गलतफहमियों और उससे उपजी तल्खियों की कहानी है। क्या इस उथलपुथल से पार जाकर संतुलन कायम करने में वे सभी सफल हो पाते है? इस कहानी को पढ़ें और अपने विचार दें, शेयर करें...
Shashi Sharma
mujhe laga sab log chale jaenge. par aapne Kahani k madhyam se Sahi raah dikhai ki pita ko putra ki galti par dantne ka swabhavik adhikaar h kash log sabak le Sahi samay par apne bacho ko guide kare
रिप्लाय
Davinder Kumar
कहानी बहुत ही अच्छी है
रिप्लाय
Nishi Rastogi
achi rachna h. kahani ant tak bandhe rakhti h
रिप्लाय
Lavita Verma
nice
रिप्लाय
Sunil Joon
nice ji
रिप्लाय
Beena Awasthi
बहुत सुंदर और भावुक कर देने वाली कहानी।
Kiran Singhal
bhut hi sunder
रिप्लाय
Neelu Goel
nice
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.