वह खास खुशबू

अशोक कुमार शुक्ला

वह खास खुशबू
(60)
पाठक संख्या − 4981
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सारांश

मैं फिर भी सामान्य ना हो सका। अपने होंठ काटने पर भी मन से निकल रही रुलाई जैसे रोक नहीं पा रहा था। अब उन्होंने मुझे अपने अंक से लगा लिया मेरा चेहरा उनकी साड़ी की परतों में छिप गया। नथुने उस खास खुशबू से भर गए जिसके लिए हम शालिनी मैम को जानते थे... उनका वह स्पर्श अद्वितीय था ...कभी ना भूलने वाला ....! कभी ना विसरने वाला...!! तृप्त कर देने वाला...!!! अमृतमयी स्पर्श...!!! ऐसा लगा जैसे साडी की उन सिलवटों के बीच हजारों दिव्य कस्तूरी बंद हों .. ।
Tripti Maurya
bhut khubsurat abhivyakti...
Govind Kumar
what is this ? what is the purpose of this story?
Beena Awasthi
छोटे बच्चे अपनी टीचर विशेष को बहुत प्यार करते हैं। बाल मन की सुंदर अभिव्यक्ति
Varsha Jagdeep
बेहतरीन
Raghubar Chawdhary
kya baat, kya baat kya baat
Ashok Kumar
अकसर बचपन में ऐसा होता है कि किसी खास टीचर से सभी बच्चे प्यार करते हैं।
Ravi Sinha
क्या था ये ?
Sangeeta Agarwal
very nice
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