वह खास खुशबू

अशोक कुमार शुक्ला

वह खास खुशबू
(30)
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सारांश

मैं फिर भी सामान्य ना हो सका। अपने होंठ काटने पर भी मन से निकल रही रुलाई जैसे रोक नहीं पा रहा था। अब उन्होंने मुझे अपने अंक से लगा लिया मेरा चेहरा उनकी साड़ी की परतों में छिप गया। नथुने उस खास खुशबू से भर गए जिसके लिए हम शालिनी मैम को जानते थे... उनका वह स्पर्श अद्वितीय था ...कभी ना भूलने वाला ....! कभी ना विसरने वाला...!! तृप्त कर देने वाला...!!! अमृतमयी स्पर्श...!!! ऐसा लगा जैसे साडी की उन सिलवटों के बीच हजारों दिव्य कस्तूरी बंद हों .. ।
Sangeeta Agarwal
very nice
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Ekta Pratik Parmar
very nice story
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Alok Tripathi
very impressive
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Sangeeta Upadhyay
hmm school Ka phela pyaar
डॉ.अनुराधा शर्मा
बहुत सुन्दर ... होता है।
Shivam Verma
थोडा अजीब है ....यार
मधु पुरी अरोरा
कहानी.अच्छी है और मैं समझती हूँ ऐसा होता ही है।मैंने काफी लम्बे अरसे तक छोटे बच्चों को पढाया है।मेरी कक्षा के बच्चों को मेरा हाथ, मेरी साडी, बैग, मोबाइल इत्यादि छूने भर से खुशी होती थी। ये भी सच है कि मैं उपस्थित होऊँ और उन्हें कोई और पढाये या मेरी झछठी नाराजी उन्हे अच्छी नहीं लगती थी।ये सब मैंने खुद देखा और महसूस किया है।
निम्मी सिंह
Kahani to achhi hai but kuch adhoora sa laga... shayad end kuch khaas nhi tha.
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