वसीयत

Neha Sharma

वसीयत
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सारांश

सोफे पर चुपचाप बैठी हुई मोहिनी अपने परिवारवालो की हर एक बात को बड़े ही गौर से सुन रही थी। मोहिनी के पति के गुजर जाने के बाद परिवार वाले मोहिनी को अपने साथ रखने की ओट में मोहिनी की पति की सारी ज्यादात ...
Aditi Tandon
सही फैसला मोहिनी जी का
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अच्छा लिखा है
Kumar Anand
esi tarah pryas kijiye
मृत्युंजय जौनपुरी
हृदयविचालित एवं हृदयस्पर्शी रचना। बहुत खूब।जी
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