लौट आओ

आशीष कुमार त्रिवेदी

लौट आओ
(111)
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सारांश

वसीमगढ़ के किले की कहानियां सुन कर मुकुंद वहाँ पहुँचा तो उसे और कई राज़ पता चले। अपनी भूल का भी जिसके प्रायश्चित का मौका कुदरत ने उसे प्रदान किया।
Davinder Kumar
आप की कहानी जीवंत है
Phool Chand Bairwa
fantastic.
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Ashish Mishra
amazing
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Nitin Yadav
bahut bhadiya
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vishal
Bahoot khub...
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Neena Sehgal
बहुत ही अच्छी कहानी
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अमितेन्द्र सिंह
सुन्दर रचना अनेकों साधुवाद।।आदरणीय त्रिवेदी जी
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अर्पित आनंद
बहुत ही सुन्दर कहानी लिखा है आपने, जितनी तारीफ की जाए कम होगी |
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Suman Barnwal
very very nice
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