लोकसभा व्यंग्य

सुभाष काबरा

लोकसभा व्यंग्य
(11)
पाठक संख्या − 1993
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सारांश

हमारे महान देश के महान प्रतिनिधियों की वजह से, लोकसभा का नजारा हम और आप रात दिन देखते रहते हैं। हालत ये हैए कि हर सांसद को लगता है, कि लोकसभा अटेण्ड करना एक बेहद मुश्किल काम है। एैसा ही दूसरा मुश्किल ...
आकाश इफेक्ट
स्तर उच्च था परंतु कटाक्षों एवं तुलनात्मक वाक्यों की कमी महसूस हुई। शोक सभा की लोक सभा से तुलना तो की पर आगे उसे अन्य मुद्दों पर जारी न रख पाएं। फिर भी इतना लिखना भी किसी स्तर से कम नही। अच्छा प्रयास रहा।
Sandeep Sachdeva
Pls extend this... Too small. बहुत कुछ होता है वहां. आखिर मे चाय नाश्ता l
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