लूट= सच्ची घटना

जयति जैन "नूतन"

लूट= सच्ची घटना
(68)
पाठक संख्या − 8856
पढ़िए

सारांश

मैं और टीना खुद से और दूसरो से एक ही बात बोलते थे कि भला हो उन चोर - लुटेरो का जिन्होने हमारी स्कूटी को टक्कर नहीं मारी ना ही कोई धक्का दिया ! वर्ना रोड़ पर दोनों तरफ़ काटो वाली झाडिया थी अगर हमारी गाडी रोड से उतरती तो ना ही हम बचते, और अगर बच भी जाते तो शरीर पर वो निशान बनते कि इसी घटना को बयां करते रहते, जीना मुश्किल हो जाता ! दूसरी खुशी इस बात से थी कि हमारे सिर और चेहरे पर चोट नहीं आयी लेकिन मेरी कमर की मूंदी चोट, मुझे आज लगता है कि कोई मामूली फ्रेकचर था शायद तभी इतनी परेशानी हुई थी जिसने बिल्कुल ठीक होने मे 1 महीना ले लिया और टीना को ठीक होने मे 12- 15 दिन लगे उसको दाये हाथ पैर मे साइड चोटे थी, सड़क पर घिसट जाने की वज्ह से ! ये बात 6 साल पुरानी हो गयी लेकिन आज भी हनुमान जयंती आती है तो इस दर्द को ताज़ा कर देती है !
Davinder Kumar
भाषा की तरफ ध्यान दीजिए काफी गलतियां आप ही कहानी में हैं
JAYESH SHUKLA
सुंदर रचना
अरुण
अरुण
हनुमान जयंती ही क्यों सूझी कहानी के लिये ?
Bikram Haryana
aapki maa kuch jyada hi jiddi hain ,maanta hu maa ko beti ki chinta Hoti hain aur aap toh Ghar se se bahar rahti thi lekin wo kuch jyada hi jiddi Kar rhi ye pta hote hue bhi ki wo Teena ke Ghar par hain unke gharwalo se baat ho chuki hain ,sorry! but Aapkeh ye ghatna aapki maa ki wajah se hui hain
रिप्लाय
rakesh garg
A true experience of one's own road accident. Nice Story.
मदन मोहन समर
दुखद संस्मरण।एक शिक्षा भी देता है
रिप्लाय
Itika Soni
इतनी रात‌ ‌को जाने ‌की‌ जीद नहीं करनी‌‌ चाहिए।
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.