लूट= सच्ची घटना

जयति जैन "नूतन"

लूट= सच्ची घटना
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सारांश

मैं और टीना खुद से और दूसरो से एक ही बात बोलते थे कि भला हो उन चोर - लुटेरो का जिन्होने हमारी स्कूटी को टक्कर नहीं मारी ना ही कोई धक्का दिया ! वर्ना रोड़ पर दोनों तरफ़ काटो वाली झाडिया थी अगर हमारी गाडी रोड से उतरती तो ना ही हम बचते, और अगर बच भी जाते तो शरीर पर वो निशान बनते कि इसी घटना को बयां करते रहते, जीना मुश्किल हो जाता ! दूसरी खुशी इस बात से थी कि हमारे सिर और चेहरे पर चोट नहीं आयी लेकिन मेरी कमर की मूंदी चोट, मुझे आज लगता है कि कोई मामूली फ्रेकचर था शायद तभी इतनी परेशानी हुई थी जिसने बिल्कुल ठीक होने मे 1 महीना ले लिया और टीना को ठीक होने मे 12- 15 दिन लगे उसको दाये हाथ पैर मे साइड चोटे थी, सड़क पर घिसट जाने की वज्ह से ! ये बात 6 साल पुरानी हो गयी लेकिन आज भी हनुमान जयंती आती है तो इस दर्द को ताज़ा कर देती है !
Zaid Akhtar Khan
कहानी अच्छी है पर शब्दों का चुनाव ठीक ढंग से नहीं हुआ है
डॉ.रमाकांत द्विवेदी
nagra की तरफ का रास्ता ख़राब ही
Azra Khatoon
Story achi achi par ache dhang se likhi hui nahi hai.
Vishal Suriya
bahut acchi story hai
Vivek Singh
sad memories
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हमराझ
डरावना
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धर्मेंद्र विश्वकर्मा
घटना बहुत दुखदायी हुई , ऐसा किसी के साथ न हो.....?
Vivek Bisaria
जीरो stars.
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