लूटन की मेहरारू

संजय कुमार अविनाश

लूटन की मेहरारू
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सारांश

घर में खुशी की लहर दौड़ चली| लुटन की माँ तो डीजे की धुन पर ठुमके-पर-ठुमके लगाए जा रही थी| एक-से-बढ़कर एक अंदाज में नृत्य भी परोस रही थी| वर्षों बाद जीवन के दायित्व जो निभाने का मौका मिला| घर वालों के ...
neetu singh
बहुत बढ़िया कहानी 👌
Manju Lata
Sab kahin Pariksha sirf aurat ki hi kyon
Praveen Yadav
वाह बहुत ही मौलिक रचना
पूर्णिमा
बहुत बढ़िया कहानी , उस सोच के खिलाफ जो सिर्फ औरत में ही कमी ढूंढ़ती हैं
Kajal Bagoriya
kiya likha h aapne ooret ko hr prkar se nicha dikhya jata h or vo sb chupchap shti h esme nayk ne apni kmi ko svikar kr bhut achha kiya jo sharniye h
Vandana Singh
कहानी बहुत अच्छी लगी
Yusuf Khan
based marmik rachna
Manju Lata Gola
बहुत ही अच्छी कहानी कमी चाहे किसी की हो किन्तु ताने हमेशा औरत को ही सहने होते हैं देर से ही सही लूटन ने कजरी के स्वाभिमान की लज्जा अपनी बीमारी को स्वीकार के रख ली ।
Smita Shree
बढिया लिखे हैं और सुन्दर लिखें शुभकामनाएं
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