लिखते हुए कुछ ख़्वाब से

अनघ शर्मा

लिखते हुए कुछ ख़्वाब से
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सारांश

1 " जब मोरे राजा पिया गये हैं बगीचा भौंरा भनर-भनर होये मेरी गुइंयाँ " लक-दक करके दामन से झाड़ो तो अनगिनत यादें झड जाती हैं। पर ये भी तो सच ही है कि इतनी आसानी से कभी कोई याद भी नहीं आता। दिली तौर पर ...
Satpal. Singh Jattan
Bahut achchhi pkd h aapki bhasha or.nice story.
Anju Chouhan
गुंइयां का मतलब बताएंगे
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