लाशें ही बोलेंगी

वंदना गुप्ता

लाशें ही बोलेंगी
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सारांश

ये वक्त चींटी की तरह काटता है. कैसे समझाऊँ? स्क्रॉल करते करते रूह बेज़ार हो जाती है , अपने अन्दर की अठन्नी अपना चवन्नी होना स्वीकार नहीं पाती. ये वक्त के केंचुए अक्सर मेरी पीठ पर रेंगते हुए झुरझुरी ...
Ashish Vashisth
shandar rachna
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satyawati maurya
बहुत सुंदर ,कमजोर और व्यस्त होते रिश्तों को खूब उभारा है आपने।
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shashikant shukla
वास्तविकता के करीब एक बहुत खूबसूरत रचना, पढ कर लगा कि सामने फिल्म चल रही है। 🙏👍
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Archana Varshney
आज की सच्चाई
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डॉ अर्चना शर्मा
वास्तविक और दिल छू लेने वाली कहानी।
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Santosh Bastiya
शब्द नही है तारीफ के, बहुत बढ़िया। कृपया मेरी रचना 'अंधेरो के साये' जरूर पढ़ें ।और अपना मूल्यवान समीक्षा जरूर दें।
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renu devgan
excellent mam...bhttt h achs lga padh kar
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Vinod agarwal
excellent
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बृजभूषण खरे
शानदार प्रस्तुति. पढ़ कर बहुत अच्छा लगा.
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kuldeep joshi
बहुत अच्छी कहानी
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