लाडो या दहेज़

अंकुर त्रिपाठी

लाडो या दहेज़
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सारांश

मेरे द्वारा लिखित एक भाई और बहन के संवाद पर आधारित अत्यंत भावुक कर देने वाली कहानी , जो कही हद तक समाज में #दहेज़ के रूप में फैली कुरीति से आपको रूबरू करवा रही होगी ! पढ़े ..और अपने बहुमूल्य सुझाव / टिपण्णी अवश्य लिखे ! अग्रिम धन्यवाद ......
Umesh Kumar
kuch bh kehna bemani hoga
Dr.Shalini Shukla Dwivedi
हम अपने आप को आधुनिक कहते हैं, परंतु आज भी स्वतंत्र भारत में बेटियां शहीद होने के लिए विवश हैं। दिल को छू लेने वाली रचना।
pt 8991717
ajkl is smaj me dahej sbse bdi vytha h jo kch log is baat ko nhi smjhte ki unke ghr b bhgwan ne ldki di h isliye apni betiyo ko itni education de ki apne pair pr khde ho ske
Sana Ansari
अविस्मरणीय बेहद दिल को छू गई आपकी कहानी बिलकुल सही लिखा आपने आज कल बेटियों से ज़्यादा दहेज़ क़ीमती मन जाता है ना जाने कब ख़तम होगी ये प्रथा और कब तक लडकियां जहेज़ के लालचियों का शिकार होती रहेगी
Nishi Chandna
yeh samaj nhi badl sakta. ladkiyon ko khud hi bold hona parega.
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Rupam
nahi ant sahi nahi h is Samsya ka mana ki Dahej bura h par usse jyada bura wo h jo Dahej lete ya dete hai,mere papa ne na to Dahej diya aur na Liya ,is Samsya ka Samadhan yahi h Jahan Dahej ki dimand ho wahan apni betiyan na de hamari jimeddari h hum betiyan Ko sunahra bhavishya de na ki Dahej k lobhi Ko bhent.
Ankit Vijay
heart touching story
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