लाजो - 1

अभिषेक📝📝📝 सिंह

लाजो - 1
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सारांश

आधी रात से ही  गहमागहमी है ।लगता है फिर आज कोई नाबालिग की नथ उतारी गई है बेचारी न जाने कहाँ से किस   मुसीबत की गुलाम हो गयी है ।अरे विमला धीरे बोलो दीवारों के भी कान होते है कहि जा कर किसी ने ताई से ...
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