लाजो - 1

अभिषेक📝📝📝 सिंह

लाजो - 1
(56)
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सारांश

आधी रात से ही  गहमागहमी है ।लगता है फिर आज कोई नाबालिग की नथ उतारी गई है बेचारी न जाने कहाँ से किस   मुसीबत की गुलाम हो गयी है ।अरे विमला धीरे बोलो दीवारों के भी कान होते है कहि जा कर किसी ने ताई से ...
vipul rai
बहचय रोमांचक कहानी है।
Priyanka Sharma
अभिषेक जी , आपकी ये रचना पसंद आई । अच्छा लेखन अपनी पहचान खुद ही बना लेता है। एक मंच है जिसपर अभी अपने इसे नहीं लिखा है। आप शब्दनगरी पर भी अपनी कहानी लिखिए, बहुत से पाठक वहाँ भी आपकी रचना को पढ़कर आनंदित होंगे, इसी आशा से आपसे ये निवेदन कर रही हूँ। आपका बेहतरीन लेखन अधिक से अधिक पाठकों तक पहुंचे बस यही कामना है मेरी। यदि मेरी सहायता की आवश्यकता हो तो मुझे प्रतिउत्तर में अवश्य बताएं। शब्दनगरी पर आप खाता बना कर लिख सकते हैं. shabd.in/Account/Register
Neelam Yadav
कानपुर की ये कहानी सत्य है मैने भी इस पर लिखा है
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Rambharosh Jha
सामाजीक कुरितियां
Deepaksh Chauhan
अति उत्तम 👌👌
Shivam Veer
सच्चाई को शब्दों का रूपांतरण
hindi@pratilipi.com
080 41710149
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