लहरों की बांसुरी

सूरज प्रकाश

लहरों की बांसुरी
(810)
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सारांश

अभी वाशरूम में हूँ कि मोबाइल की घंटी बजी है। सुबह-सुबह कौन हो सकता है। सोचता हूँ और घंटी बजने देता हूँ। पता है जब तक तौलिया बाँध कर बाहर निकलूंगा, घंटी बजनी बंद हो जायेगी। घंटी दूसरी बार बज रही है, ...
Somesh Ârmo
👌👌👌👌👌
Nikki Agrawal
amazing..... speechless....
Laxmi devi
बहुत ही जिन्दा दिल स्टोरी पहली बार पड़ी है
Sudha Sharma
best story si far...friendship is like thias
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Bharti Vashishtha
I have no words
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aparna
नमस्कार सर ,आज आपकी लहरों की बांसुरी पढ़नी शुरु की ,तो जब तक कहानी खत्म नही हो गयी,कुछ और कर ही नही पाई,खत्म होने के बाद भी अब तक उसकी धुन सुन पा रही हूँ और महसूस कर रहीं हूं ....इतनी सुन्दर कहानी रचने के लिये आपका हृदय से धन्यवाद ।।
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Hitendra Kumar
पढने कि लत लग चुकी हैं... और आप जैसों कि रचनाये... बस कहनाही कया.... पुरुष ओर स्त्री की निर्मल मित्रता का एक उदाहरण... क्रिष्ण ओर पांचाली है.... हम हमेशा हमारे जीवन मे यह भावना कि तलाश मैं रहेंगे... आभार...💐
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