लहरों की बांसुरी

सूरज प्रकाश

लहरों की बांसुरी
(896)
पाठक संख्या − 93874
पढ़िए

सारांश

अभी वाशरूम में हूँ कि मोबाइल की घंटी बजी है। सुबह-सुबह कौन हो सकता है। सोचता हूँ और घंटी बजने देता हूँ। पता है जब तक तौलिया बाँध कर बाहर निकलूंगा, घंटी बजनी बंद हो जायेगी। घंटी दूसरी बार बज रही है, ...
Neelam Jangra
very good Sir👌👌💐💐
sonu
आप सचमुच एक श्रेष्ठ साहित्यकार हैं. प्रतिलिपि में पढ़े गए मेरे पसंदीदा लेखकों में आप भी शामिल हैं.
shwati pandey
वाह सर ...किन लफ्ज़ो में बयां करु ...बेहद खूबसूरत काहानी ..और बहुत ही खूबसूरती से पेश किया आपने की मन से जुड़ा रिश्ता तन से जुड़े रिश्ते से ज्यादा खूबसूरत होता है जो आजिवन हमारे ज़ज़्बातो को संजोये रखता है। 🙏🙏
रिप्लाय
सुखदेव एस.
क्या कहूं क्या लिखूं ..... मेरा ज्ञान जीरो है आपकी इन रचनाओं में , आपकी वाकई बेहद खूबसूरत रचने पढ़ने का जो अवसर मुझे मिला । शायद में जीवन भर ना भुला पाऊ ।
रिप्लाय
Pallavi Verma
संजो के रखने लायक लेख
suhana
wow this is called a story ,,,,
रिप्लाय
अनुश्री त्रिपाठी मिश्रा
wow, behad khubsurat Safar aur Dosti 👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌
रिप्लाय
Vibhor Gaur
पहली बार आपकी कहानी से पूरी तरह असहमत हूं, कहानी बिंदास लड़की की है जो अपने एक फेसबुक मित्र के साथ एक बीच पर जाने का प्रोग्राम बनाती है, वहां जाकर 3 दिन उसी मित्र के साथ रूम शेयर करती है दारू पीती है समंदर की लहरों में बिना कपड़ों के नहाने से गुरेज नहीं करती है, मगर जब पुरुष मित्र के साथ सेक्स करने की बारी आती है तो वहां बचकर निकलना उसकी पूरी यात्रा की सबसे बड़ी विजय है। सेक्स जैसी बेहद सहज क्रिया से इतना भागना... इतना बचना मगर सारा टाइम उसी को दिमाग में रखना इसे किस तरह से जस्टिफाई कर सकते हैं आप? जबरिया मॉडर्न होने की ज़िद में हम किसी भी फेसबुक मित्र के साथ एक बीच पर तीन अंजानी रात गुजारने के लिए जा सकते हैं, दारू पी सकते हैं, बिना कपड़ों की अपने घर की छत पर सो सकते हैं, बरसात में बिना कपड़ों के अपनी छत पर नहा सकते हैं... मगर एक पुरुष मित्र के साथ उसी के बंद कमरे में सेक्स के हौव्वे को हम इतना ज्यादा दिमाग में लेकर चलते हैं, की उसी रिजॉर्ट पर हम तीनों राते सिर्फ अपनी सावधानी अपने बचाव को लेकर जाते रह जाते हैं। अगर इसे बेहद सहजता के साथ जी लिया गया होता तो तीन रातें सुख से सो सकते, बस उस अनजाने फेसबुक फ्रेंड के दिमाग में अपनी अच्छी छवि छोड़ने के चक्कर में ना ही उसे, ना ही खुद को इन मोमेंट्स को भरपूर जी लेने दिया गया... मैं से पूरी तरह सहमत नहीं हूं।
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.