लव बेवफा से होता है

जयति जैन "नूतन"

लव बेवफा से होता है
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सारांश

चेतना और पुलकित का आपसी सामंज्स्य जिसे उन्होने प्रेम का नाम दिया, वो परवान चढा और सारे दोस्तों तक खबर पहुच गयी, प्रेम होता तो टिकता भी, यहा तो क्रश था ! क्रश का खुमार रहता भी तभी तक है जब तक दूसरा क्रश ना मिल जाये ! चेतना की रूमी शालकी को पुलकित छिछोरा और घटिया लगता है, ग्रुप में साथ थे अलग बात थी लेकिन असलियत यही थी ! चेतना इस रिश्ते को लेकर गंभीर होने लगी तो शाल्की ने पुलकित की हर्कतों का भान्डा फ़ोड दिया ! काफ़ी झगडा हुआ दोनों के बीच, दरार आ गयी दोस्ती में और दूसरी तरफ प्रेम का बे बुनियाद रिश्ता भी डूब गया ! दूसरी ओर शालकी और धीर का रिश्ता बना जिसमे शालकी किसी तीसरे की हो गयी और धीर अकेला रहा ! धोखा खाने के बाद भी अकल नहीं आती कइयों को ! चेतना के ग़म का साथी दुखी धीर बना, 3 साल से अलग अलग शहरों में होने के वाबजूद दोनों की लगातार बातें होती रही और.......
ravi
मेरे साथ ऐसे ही हुआ बिल्कुल।😂😂
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