लव ऐट द एज ऑफ़ सेवेनटीन

शशांक भारतीय

लव ऐट द एज ऑफ़ सेवेनटीन
(237)
पाठक संख्या − 11947
पढ़िए

सारांश

उसने गाना ख़त्म किया और मुस्कुरायी. मुस्कुराती “वो” पांच साल पहले भी थी. दिक्कत तो यही थी की बस मुस्कुराती ही तो थी…मैं भी मुस्कुरा देता था… मेरे दोस्त भी मुस्कुरा देते थे… इंटरमीडिएट के उन दिनों में मुस्कराहट फ़ैल गयी थी. विकासनगर की शाम कुछ ऐसी लगती थीं की मेरे मुहब्बत की दास्तान के लिए ही हों.
Bhuvnendu Arjariya
बहुत मजेदार
SANCHIT SRIVASTAVA
bhai aapki ganwara ladke wali story kha gyi..BHut achi thi.mujhko padhni hai.kripya bheje
रिप्लाय
शुभम शर्मा 'पंडित'
कही छोरी के मन मे शशांक शर्मा होता तो...?? ठाकुर साहब की भैंस तो गयी थी पानी मे.
रिप्लाय
Arvind Saxena
very interesting and creative
raju
kuchh khas nhi laga
रिप्लाय
Ravi Singh
लेखन शैली उत्तम
kranti maurya
अच्छी कहानी....लिखने का अंदाज बहुत सुंदर ....।
Nitin Uniyal
too good, infact it's like a live TV show
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.