लन्दन की गलियों से

शिखा वार्ष्णेय

लन्दन की गलियों से
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सारांश

गर पाने हों मोती सच्चे तो उतरो गहरे सागर में, जो देखना हो शहर तो गलियों से गुजर कर देखो। सभ्यता की शुरुआत में जब शहरों का विकास आरम्भ हुआ होगा तब ये गलियां बेशक आवागमन का साधन रही होंगी फिर समय के ...
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