लघुकथा - सफाई भाग 1

प्रवीण कुमार गुमनाम

लघुकथा - सफाई भाग 1
(40)
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सारांश

रेलगाडी़ पेन्ड्रा स्टेशन रुकी । कुछ यात्री नीचे उतरे और कुछ सफर करने के लिए चढ़े । गाडी़ बिलासपुर की ओर रवाना हुई , एक व्यक्ति बोगी में झाडू से सीटों के नीचे का कचरा साफ करता और बैठे यात्रियों के सामने हाथ फैलाता । लोग पॉच दस रुपये उसके हाथ में रख देते और वो आगे बढ़ जाता । मेरी सामने वाली सीट पर दो लोग उस गरीब झाडू वाले का मजाक बना रहे थे । जब वह मेरे सीट के नीचे सफाई कर रहा था , तो वे लोग उसकी खिचाई करने लगे , उन दोनों में से मोटा वाला बोला, ये झाडू तेरा नाम क्या है , साहब हठीला
Nagesh Tiwari
but cleaning means haanth ki safai to nahi
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Ashok kumar
जैब मे गांधी और मुंह मे गोडसे।
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भूपेन्द्र सिंह चौहान “राज़”
सर,निशब्द हो गया,शब्द ही छीन लिए आपने,तारीफ़ कैसे करूं
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Durgeshwari Sharma
शानदार जी
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Ravindra Narayan Pahalwan
बहुत अच्छे बिन्दु को स्पर्श किया है / कम शब्दों में गहरी बात कहने की ताकत है, आपकी कलम में / आपकी कलम को प्रणाम...
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सरोज वर्मा
very nice
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