लघुकथा:गुरू जी

हेम चन्द्र जोशी

लघुकथा:गुरू जी
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सारांश

गुरू तो सदैव गुरू ही होता है। निश्चल भाव से अपने शिष्यों का भला चाहने वाला। पर कितने गुरू वास्तव में गुरू समान हैं ?
बलकार सिंह गोराया
गुरू साक्षात पारब्रह्म, तस्मै श्रीगुरवे नमः । गुरूजन सदैव हितकारी होते हैं। बहुत सुंदर और सही लिखा है जी आपने। शुभकामनाएं।
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अनिल कुमार
गुरु की बराबरी कहीं नहीं है । अति सुन्दर ।
Dr. Santosh Chahar
गुरु का कद इसलिए ही ऊंचा रहता है।
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