रुक्मणी

Kumar Gupta

रुक्मणी
(56)
पाठक संख्या − 768
पढ़िए

सारांश

ये हमारी कल्पना मात्र एक रचना है ।आशा करता हूँ आपसब पसंद करेंगे । बस चाहता हूँ किसी के भावना आहत न हो ।
Manju Pant
क्या बात है क्या खूब लिखा है ।सब पूछ रहे हैं पर उत्तर सबके अन्तर मे है ।
रिप्लाय
Nidhi Singh
very very nyc 👌👌
रिप्लाय
Neha Singh
अदभुत 👌👌😍😍😍
रिप्लाय
Sonnu Lamba
सुन्दर👍
रिप्लाय
Jaya bhardawaj
बहुत खूबसूरत
रिप्लाय
Poonam Kaparwan
nice krishna radhey g ke hi thy rukmani kaa pyr bahut saccha tha nice creation
रिप्लाय
Sneha
whaa बहुत खूबसूरत रचना👌👌👌👌
रिप्लाय
Kalyani Jha
बहुत ही बेहतरीन 👌👌👌👌बहुत ही प्यारी रचना👌👌
रिप्लाय
Abhimanyu Sharma
it's true
रिप्लाय
Vandna Solanki
बहुत खूब लिखा!!वो कब हमारे थे रुक्मिणी के आहत दिल की व्यथा को बखूबी बयां किया है आपने!!
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.