रीति- रिवाज़

मंजू सिंह

रीति- रिवाज़
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सारांश

रीति रिवाज़ कभी कभी ऐसे मोड़ पर आ जाते हैं की उन्हें निभाना जीते जी मरने से भी बदतर हो जाता है .. ा समय आ गया है की ऐसे रिवाज़ों को हम खुद ही तोड़ de
और्व विशाल
प्रेरणास्पद कहानी
Ritu Agrawal
aisi kahaniyan likhe Jane ki bahut zaroorat hai.....badhai ek uttam rachna ke liye.
Purhythm
खूबसूरत रचना
Madhur Shakya
सुमिका पति जो हे एक आदर्श पुरुष हे l उनके भावनाको मे कदर करुंगा l समाज परिवर्तन के लिए एसे हि अादमीयो कि जरुरत हे l धन्यवाद l
राजीव पुंडीर
एक लड़की की कश्मकश और रीति रिवाजों के बन्धन !! सुंदर रचना।
ए . असफल
31 दिसंबर 15 को सहमति नाम से प्रकाशित मेरी कहानी आपने पढ़ी और अपनी प्रतिक्रिया मेल पर दर्ज कराई। उसके अंत से मैं संतुष्ट नहीं था। तब इसी कथानक पर मैंने दूसरी कहानी प्रतिलिपि को भेजी। इसका शीर्षक द्रोपदी है और वह 30 जून 16 को प्रकाशित की गई है। आपने वह कहानी सहमति पढ़ ली, पर द्रोपदी फाइनल है। मैं भी इसके अंत से संतुष्ट हूं। कृपया द्रौपदी और पढ़ने का कष्ट करें फिर मुझे अपनी राय से अवगत कराएं आभारी रहूंगा।
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