रीति- रिवाज़

मंजू सिंह

रीति- रिवाज़
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सारांश

रीति रिवाज़ कभी कभी ऐसे मोड़ पर आ जाते हैं की उन्हें निभाना जीते जी मरने से भी बदतर हो जाता है .. ा समय आ गया है की ऐसे रिवाज़ों को हम खुद ही तोड़ de
Amit Vashist
Valais me Manju ji in riti riwajo ko khatam kar Dene kar samay aa gaya h, par Jin k pas paisa h wo log ye baat nhi Samaje or apni jhuti Shan dikhane k lies is ko jyada badawa dete h or bechara garib fasta h....
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Gaurav Neema
आज हमें पुराने दकियानूसी विचारों/परंपराओं को त्यागना ही होगा तभी हम समाज मे बराबरी की बात कर पाएंगे । बहुत ही अच्छी रचना है आपकी बधाई.....👍👌💐
और्व विशाल
प्रेरणास्पद कहानी
Ritu Agrawal
aisi kahaniyan likhe Jane ki bahut zaroorat hai.....badhai ek uttam rachna ke liye.
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