रियल रिलेशनशिप

संजीव जायसवाल ' संजय '

रियल रिलेशनशिप
(705)
पाठक संख्या − 44741
पढ़िए

सारांश

‘‘नितिन, हमने जो अभी किया है क्या वह हमारा प्यार नहीं था ?’’ रागनी की आंखे छलछला आयीं । ‘‘ओह, तो तुम उसकी कीमत वसूलना चाहती हो ?’’ नितिन के होंठ व्यंग्य से टेढे हो गये । ‘‘नितिन !’’ रागनी चीख पडी । अपमान से उसका चेहरा लाल हो गया और वह तडपते हुये बोली,‘‘अगर कीमत ही वसूलना चाहूं तो एक रात में इतना वसूल सकती हूं जितना तुम पूरे महीने में नहीं कमा पाते होगे ।’’ ‘‘अगर तुम्हें अपने देह की कीमत मालुम है तो फिर यहां क्या कर रही हो ?’’ नितिन का स्वर भी तेज हो गया ।
shrawan kumar
अच्छी कहानी
V Kash Mishra
हर महानगर में जीवंत हर युवा की कहानी इस लेखन के माध्यम से....ज़रूरी नही की सभी ऐसे हों...
Rekha Bhagat
कहानी बहुत अच्छी. है
Navisha Soni
बेहतरीन सारगर्भित रचना है
Jyoti Sharma
नमस्ते 🙏 जी,बहुत खूब लिखा है आपने इस कहानी very nice story निशब्द 💐💐💐🌷🌷☺☺
Mala Arya
बहुत भावना प्रधान ओर महानगरों की जटिलता भरी जिंदगी का वास्तविक चित्रण,, लिये कहानी का किरदार नितिन बहुत ही समझदार ओर संवेदनशील इंसान,, कहानी का ये कथन :कि हम समर्पण व पवित्रता का ये अनमोल उपहार क्या फिर किसी को दे पायेगे? बहुत ही ह्रदय स्पर्शी ओर भावनाओं से भरा👌✍️🌹
रिप्लाय
Tanu Mishta
bht hi achhi kahani dil khush ho gya
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.