रिटायरमेंट - काम वाली -प्रदीप कुशवाहा

प्रदीप कुशवाहा

रिटायरमेंट - काम वाली -प्रदीप कुशवाहा
(26)
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सारांश

रिटायरमेंट - काम वाली --------------------------- '' क्या बात है मोना की मम्मी आज कुछ असुरी लग रही हो , फटे बांस की बांसुरी लग रही हो। करवा चौथ में पूर्णमासी की चाँद थी, अब क्यों दिवाली की बुझी ...
Sachindra kumar kamal
सही बात है
मधुलिका साहू
बहुत अच्छा व्यंग । सबकी परिभाषाये अलग अलग होती हैं
Mamta Rathore
क्या खूब लिखा है,वाह
bijendersanjeev
😆
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नृपेन्द्र शर्मा
वाह , बहुत बढ़िया sir
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रमेश मेहंदीरत्ता
मजबूरियां ही है सर
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Balauria S
Wah bahut badiya😆😆😆😆
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Anju Chouhan
wah wah
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ajay
maza aa gya
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