रिक्शा वाले अंकल

निजा

रिक्शा वाले अंकल
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सारांश

"पूजा बिटिया, इतना दूर क्यों बैठी हो? यहाँ आ जाओ...इधर, मेरे पैरो पर...हाँ ...बस बिलकुल एसे ....हररोज यहाँ ही बैठना है तुम्हे ...ठीक है ?" ग्यारह साल की पूजा कुछ भी बोली नहीं. उसे रिक्शा में आगे ...
Shailesh Kumar Dubey
समाधान खोजिये कहानी से
P. K
વાહ વાહ
दिलीप मकवाना
बहुत खूब....अप्रतिम👌
रविंदर गुडवानी राम राम राम राम राम राम राम राम
माँ बाप को अपने बच्चों के बीच एक समन्वय बना कर रखना चाहिये ताकि बच्चे कुछ भी बताने से डरें नहीं अपितु अपने माता पिता को अपना दोस्त समझें... बाकी भी बहुत कुछ.... कहानी उत्तम है...
SONU MOURYA
aap bahut achha lakhti hai ''very nice''
eshaan Saluja
bahut acha likha hai apne. aaj Kal such me ऐसा होता है बहुत से बच्चे ये सब घर पर नहीं बता पाते hai in sab ko रोकने के लिए समाज को कुछ करना होगा नहीं तो इन बच्चो को हम ऐसे ही खोते जायेगे
जोरा सिंह भौरिया
मार्मिक कहानी। प्राचीन काल से ही पुरष प्रधान देश में बहुत जल्दी मानसिकता बदलने वाली नहीं।
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