राष्ट्रवाद है छलनी

राहुल कुमार

राष्ट्रवाद है छलनी
(1)
पाठक संख्या − 23
पढ़िए

सारांश

*राष्ट्रवाद है छलनी* जातिवाद के तीरों से राष्ट्रवाद है छलनी। जनता को पग-पग ठगिनी माया छलती।। कई दलों से यह 'मोहिनी' बन निकलती। देश न जन बस दल हित का रास है रचती।। अखण्ड राष्ट्र को दो संबल ऐ 'लोकतंत्र ...
रचना पर कोई टिप्पणी नहीं है
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.