रामलीला

संतोष कुमार

रामलीला
(14)
पाठक संख्या − 1473
पढ़िए

सारांश

प्रस्तुत कथा रामायण की कहानी नहीं है न ये किसी प्रकार की धार्मिकता का आहवाहन करता है. अपितु ये कथा नाटक के पीछे की पेचीदगी व रामलीला को आधार बनाकर मानवीय संवेदनाओ की कहानी गड़ी गयी है. इसका केंद्र बिंदु मानवीय मनोविज्ञान व नारी विमर्श है.
डॉ.
अच्छी कहानी है... मेरी कहानी "अफ़सोस" पढ़कर अपनी प्रतिक्रिया दें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.