Poonam Tiwari
अति सुन्दर रचना ऐसा लगा कि अपने घर की कहानी ही पड़ रही हूँ
अनुश्री त्रिपाठी मिश्रा
हद है सचमुच , लगभग हर घर की वही कहानी, बस कहीं कुछ कम और कहीं कुछ ज्यादा, पति बाहर जाता है तो थकता है उसे हक मिल जाता है ना बिना वजह पत्नी पर चिड़चिड़ाने का , और पत्नी उसका क्या, वो चाहे घर संभाले या घर और नौकरी दोनों , उसे सुनना ही होता है।
Umesh Kumar
Wah Wah.. ab kisi din aurato wali lines bh likh dijiye, jo vo aadmiyo Ko bolti h.
s s
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uff.... kami us aurat me nahi tumhare dimaag me hai.jo jaisa hai use vaisa accept karne me itni pareshaani kyu hoti hai .
deepak verma
समझने की बात है जी ।
yunika singh
very nice...AP ne ek Kahani k do parts dikha diye Jo ki bhut acche the..aadmi ki soch wahi rahi..pehle khud bol raha tha aise Karo vaise Karo..jab wo karne lagi tab bhi usko chain nhi hai..ye baat aaorat bolni chahiye Mai kuch bhi Kar lu rahoge tum wahi..
Vandna Solanki
एकदम सच्चाई बयां कर दी आपने
ShrUti DubEy
it actually happens.. 🤤🤤
Meena Bhatt.
bahut khubsurat.kuchh madam ko bhi moka milna chahiye tha bolane ka.ati sundar
Nidhi Vyas
wah ri aurat ....bahut sundar rachna
Dev Tiwari
बहुत सुन्दर रचना👌👌👍 गजब 😢😡
Kundan Sinha
वाह, क्या बात है madam। लाज़वाब।
स्वधा रवींद्र
सच यही होता है, आप बदलते जाते हो संसार संतुष्ट नहीं होता है।
Pradeep Gupta
jab duniya Bhagwan se complain Karti h to ham kya chij h be natural
Kamal Bishnoi
अच्छा, किंतु सिक्के का दूसरा पहलू भी दिखलातीं तो बढ़िया होता।
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Sunny kumar
किया बात है मैम ! बिल्कुल सही कहा है इसमें आपने...
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