रविवार

आशिष पण्डित

रविवार
(41)
पाठक संख्या − 522
पढ़िए

सारांश

रविवार था आज........ बिस्तर पर पड़े-पड़े मोबाइल पर ऐसे ही उंगलिया चला रहा था,की तभी किसी ने दरवाजे पर घण्टी बजाई। दरवाजा खोला तो सामने एक लड़की खड़ी थी.. उम्र यही कोई 10-12 साल रही होगी। मेरे कुछ पूछने ...
Poonam Kaparwan
nisabd hu.more problems are in humanbeings
रिप्लाय
Neha Mishra
बेहद मार्मिक और सुंदर रचना
रिप्लाय
अमितेन्द्र सिंह
बेहद खूबसूरत एवं मार्मिक रचना बधाई स्वीकार करें
रिप्लाय
वीरू मीना
its shows reality of our society....
रिप्लाय
Unofficial Researcher.
अच्छी सोच है इस कहानी के माध्यम से।
रिप्लाय
Gudiya kumari
very heart touching story....
रिप्लाय
ShaliNi ShaRma
Heart touching story..
रिप्लाय
Damini
बहुत ही सुंदर रचना है आपकी बधाई हो
रिप्लाय
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.