रज्जो का अंत #ओवुमनिया

नीरज शर्मा

रज्जो का अंत #ओवुमनिया
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सारांश

रज्जो के सिर से खून बह रहा था पर महेश को इस बात की कोई चिंता ना थी , वह उसे पैर से पकड़ कर घसीटते हुए सुनसान जगह पर ले जा रहा था , जहां वह उसे जान से मार सके । रज्जो घिसटती हुई जा रही थी और महेश से ...
संतोष सुधाकर
लिखने की कला अच्छी है 👍
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Chhoti Thakur
aap bhat aacha write karte he niraj Ji well done
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Maanvik Rawat
कृपया ऐसी रचनाएं ना लिखें कि लोगो का भलाई पर से विश्वास ही उठ जाए।
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Rajkumari Mansukhani
dukhad ho Raha hai paraya khoon akhir paraya hi Nikla system ke praying bhi gussa as Raha hai iswar sabko Budhi de per writer ji problem to sab jante hai AAP solutions likiye gbu my dear
Meera Parihar
ईश्वर सब देखता है,इन्सान अपने किए पाप के बोझ से कभी मुक्त नहीं हो पाता
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Ravinder Kumar
Behtrin rachna
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Seema Singh
aaj k wqt ki sachai ka aaina h ye kahani...🤐
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Rakesh
Nyc
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Pooja Arora
ye kahani samaj ka bahut hi ghinona chehra thi ..jisse aapne bade acche dhang se pesh kiya ..hearttouching story
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Rcm Vinod Nagal
https://drvinodnagal.rcmnutricharge.com9813286386
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