रज्जो का अंत #ओवुमनिया

नीरा

रज्जो का अंत #ओवुमनिया
(52)
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सारांश

रज्जो के सिर से खून बह रहा था पर महेश को इस बात की कोई चिंता ना थी , वह उसे पैर से पकड़ कर घसीटते हुए सुनसान जगह पर ले जा रहा था , जहां वह उसे जान से मार सके । रज्जो घिसटती हुई जा रही थी और महेश से ...
Dilip bharti
कहानी कहीं से जम नही रही है!
Rizwan Khan
paisa hr rishte ko mar deta he
मीरा परिहार
ईश्वर सब देखता है,इन्सान अपने किए पाप के बोझ से कभी मुक्त नहीं हो पाता
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Sudhir Kumar Sharma
अद्भुत मार्मिक
संतोष सुधाकर
लिखने की कला अच्छी है 👍
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Chhoti Thakur
aap bhat aacha write karte he niraj Ji well done
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Maanvik Rawat
कृपया ऐसी रचनाएं ना लिखें कि लोगो का भलाई पर से विश्वास ही उठ जाए।
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Rajkumari Mansukhani
dukhad ho Raha hai paraya khoon akhir paraya hi Nikla system ke praying bhi gussa as Raha hai iswar sabko Budhi de per writer ji problem to sab jante hai AAP solutions likiye gbu my dear
Ravinder Kumar
Behtrin rachna
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