योग्य युवराज -1

अरुण गौड़

योग्य युवराज -1
(98)
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सारांश

राजकुमार ने अपनी पहचान छुपाते हुए रानी परी से कहा, “मै एक लकडहारा हूं, मै दिन मे लकडी काटने के उद्देशय से यहां आया था, परन्तु आदमखोर शेर ने मुझ पर हमला कर दिया, जिसके दिये घावो के कारण मे यहां बेहोश होकर गिर गया था।“ जय की बात सुनकर भी रानी का गुस्सा शांत नही हुआ, वह बोली, “अपराध चाहे जानकर किया हो या अंजाने मे लेकिन अपराध तो किया है, और उस अपराध की सजा भी मिलेगी”.....................
Savita Mantri
bahut khubsoorat story
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Uma Tyagi
Bahot achchi story
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Jivaram devasi Dhamana
बहुत ही सुंदर है
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Madhu Chamria
nice
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Sandhya Bhadoria
अच्छी कहानी पाठक को अत तक बाँधे रखने में सफलता प्राप्त हुई हैं।
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Dilip kumar Patel
भाई साहब आपको बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ आपका द्वारा लिखित कहानी बहुत ही रोचक एवं वीरतापुर्ण थीं पठ कर आनन्द हुआ जय श्री कृष्ण
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विक्रांत कुमार
बढ़िया शुरुआत
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G gaur
कहानी के दोनों भाग अच्छे हैं
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Deepak Rathor
अति सुंदर रचना है मित्र।।
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Rajkumar Single
जय श्री राम हाथी का निबंध फ्लाइंग बारे में भेजें
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