ये तो न सोचा था?

भावना

ये तो न सोचा था?
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सारांश

बी.एस.सी. नर्सिंग की पढ़ाई पूरी होने के कुछ महीनों के प्रयास में ही प्रियल का सरकारी नौकरी में चयन हो गया और उसे रायगढ़ के एक हॉस्पिटल में नियुक्ति मिली है........तभी बहुत देर से दूर खड़ा अंकित (जो काफी देर से सबकी बातें सुन रहा था और जिसकी उपस्थिति लगभग सब भूल ही चुके थे) तपाक से बोल पड़ा- "अगर आप लोगों की अनुमति हो तो इस ज़ंजीर की कड़ियों को जोड़ने वाले इस हुक को भी साथ ले लें"....फिर प्रियल की ओर देखते हुए शरारती मुस्कान के साथ बोला.....
brijendra kumar
अतिसुन्दर
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Nisha Agrawal
awesome story😘
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Archana dipak Kumar
सुन्दर कहानी है
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Harikesh Singh
Great, nice story
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Kaniz Fatma
outstanding.... aur apki shayeri ne to char chand LGA dia....love this
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Vipanjeet kaur
Bahut hi vadia story bhawna g.face blush ho gya
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SuniL GrewaL
👌👌👌👌👌👌👍
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Cma Monika Gupta
very nice story, I like it very much
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Swati Chopra Hasija
bahut hi shandaar kahani. Bahut achcha lekhan badaai aapko. Aisi achchi kahani likti rahe
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Poonam lala
bahut hi achchi rachna...badhaii
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