युवा प्रेरणा के अक्षय स्रोत: विवेकानन्द

केशव मोहन पाण्डेय

युवा प्रेरणा के अक्षय स्रोत: विवेकानन्द
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सारांश

जब ऐतिहासिक महापुरुषों की ओर देखता हूँ तो एक ही रूप पर दृष्टि ठहर जाती है। चित्त प्रसन्न हो जाता है। उधर नज़र पड़ते ही दिखायी देता है उन्नत तेजयुक्त ललाट, केशरिया वस्त्र, दिखायी देती है विशाल पगड़ी। दीप्तिमान मुख मंडल। नयनाभिराम बड़री आँखें। गौर वर्ण काया। अधर पर मृदु हँसी। साथ ही दिखायी देती है कई क्रियाएँ, कई भंगिमाएँ। ध्यान मग्न चिंन्तक। मुखर वक्ता। अथक राही। दृढ़ निश्चयी युवक। सरल संन्यासी। गहन विचारक। सब कुछ एक ही व्यक्ति में देख लेता हूँ मैं। वह व्यक्तित्व है विश्वनाथ दत्त एवं भुवनेश्वरी देवी के लाल का। वह व्यक्तित्व है कोलकाता के सिमुलिया मुहल्ले के एक युवक का। स्वामी रामकृष्ण परमहंस के परम शिष्य नरेन्द्र नाथ का। वह व्यक्तित्व है भारतीय गरिमा का यशोगान करने वाले दृढ़ निश्चयी, प्रखर वक्ता स्वामी विवेकानन्द का।
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बहुत ही खूबसूरत समझाया है अपने कम शब्दों में ।
Manisha kumari
i am inspired to read this......thanks a lot!
Raj Sharma
उत्तम लेखन
Saini Saini
स्वामी जी के जीवन के बारे में भी कुछ बताए
Himanshu Tak
लेख पढ़कर मन प्रफ़ुल्लित हो गया.....अतिउत्तम
I.P. Nirala
बहुत खूब। सही बातें लिखीं हैं आपने। विवेकानंद जी हमेशा युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है।
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