यक्षगान

अखिलेश

यक्षगान
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सारांश

(यह काल्पनिक कथा है। इसके चरित्र, स्थान, घटनाएँ, मंतव्य सभी कुछ काल्पनिक हैं। उनका वास्तविक जीवन से कोई भी संबंध नहीं है।) सरोज जिस दिन पैदा हुई थी, विष्णु दत्त पांडेय ने चार बीघे खेत का मुकदमा जीता ...
urmila
आज की राजनीति का घृणित चेहरा दिखाया आप ने, पर इस चेहरे की गन्दगी को साफ करने की कोई दवा भी सुझाते तो और अच्छा रहता
Vishakha Gupta
अंत ठीक लिखा जाता तो कहानी बहुत खूबसूरत होती
Harvinder Jit Kaur
from mid onwards story becomes bakwas.
दीपा
kahani to bht acchi h...lekin saroj ka kya hua
Kamal Kishor
Why Pratilipi is keeping in love story category? Madam Veena Vatsal Singh ji, please consider this question.
Swarn
please don't write
Monika chauhan
ant bahut hi bakwash he
महेंद्र कुमार पाल
कहानी आज की राजनीति का दर्शन करवाती है परंतु बिना सटीक अंत के समय की बर्बादी लगती है.......
ekta pratik parmar
kyani acchi he lekian adhuri he.
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