मोहोब्बत

Meenakshi Gupta

मोहोब्बत
(30)
पाठक संख्या − 149
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सारांश

क्यों तुम याद आते हो क्यों बार बार रुला जाते हो न चाहते हुए भी तुम मेरी ज़िंदगी में दस्तक क्यों दे जाते हो निकलना चाहती हूं मैं अब सपनों की दुनियां से पीछे छोड़ देना चाहती हूं मैं अब तुम्हारी यादों ...
NAVJEET PARIHAR
ये फिर भी ठीक है अंत मे गड़बड़ा गए , और " मैं" पढ़ने से पहले वाली पर ही मैंने कह दिया था कि मन के भावों को लिखा गया है !
Uday Veer
woho lajabab Kabil'e tarif fully to hearttuching
मनीषा सहाय
बहुत सुंदर रचना..... मेरी कहनी साझी पीड़ा जरूर पढ़े
शैलेश सिंह
बहुत खूबसूरत कविता।।
आनन्द त्रिपाठी
बहुत ख़ूब!इतनी शिकायत तो लाज़मी है☺️👍
Ajay Gupta
बहुत ही अच्छा
Shivraj Singh Rana
very nice
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विनय
👌👌👌
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