मै देह का भूखा नहीं था

डॉ.रमाकांत द्विवेदी

मै देह  का भूखा नहीं था
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सारांश

पुणे १२ जनवरी की रात सुनसान सड़क पर दीपक की कार हवा से बाते कर रही थी कार में लगे म्यूजिक सिस्टम पे गाना बज रहा था—आ लग जा गले कि हसीन रात हो ना हो शायद इस जन्म मुलाकात हो न हो | इसे रूमानी माहौल में ...
आकाश लोहानी
कहानी अच्छी हो या ना हो लेकिन आपने बिहारी को अच्छा समझा शायद आप भी बिहारी हो क्योंकि मैं बहुत सारे कहानियां और फिल्म मैं देखा और सुना हूं बिहारियों को गुंडे से तुलना की जाती है आपका धन्यवाद
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अजय अमिताभ सुमन
एक नकारात्मक कहानी। स्त्री के स्वतंत्र विचार का होना कोई जुर्म नहीं।गलती दुष्कर्म करने वालों में है।सजा दुष्कर्म करने वालों को मिलनी चाहिए न कि स्त्री को।
सरोज वर्मा
अच्छी कहानी
Rakesh Pal
प्रयास अच्छा हैं, समाज के उन हिस्सों के लोगो को जो इस विचार में जी रहे हैं।
Virendra Singh
बहुत बहुत बहुत बहुत धन्यवाद इसे लिखने के लिए
Prakash
nice 👏👏👏
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