मैं सूर्य देखना चाहता हूं!

डॉ.अभिज्ञात

मैं सूर्य देखना चाहता हूं!
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सारांश

पहले उसकी ज़िन्दगी में ऐसा नहीं था। सूर्य पूरे इतमीनान से सदियों से जी रहाथा। कोई बड़ी हलचल उसकी ज़िन्दगी में नहीं मची थी। उसका जल-जीवन तमाम तिलिस्मोंसे भरा हुआ था, लेकिन उसमें कोई विस्मय नहीं था। एक ...
Shashikant Tripathi
साइंस फिक्शन पढ़ने को मिला बहुत दिन बाद ।
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