मैं बहुत खुश था और फिर.....

धीरज झा

मैं बहुत खुश था और फिर.....
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सारांश

कल ट्रेन पकड़ी और पहुंच गया उस जिले में जहाँ उसका घर है । फिर वहाँ से बस ले कर उसके शहर की तरफ रुख कर लिया । भई जाता भी कैसे ना अब नही रहा जाता उसके बिना । ये बंदिशें सहना सच्चा प्रेम कर के भी चोरों जैसा अनुभव करना भाई बहनों की जली कटी बातें सुनना ये सब अब नही सहा जाता इसीलिए सोच लिया कि अब तो प्राणप्यारी के पिता जी से मिल कर सारी बात कह ही देनी है । मन बिल्कुल नही डरा प्यार की ताकत है भई बन्दे को झुकने नही देती । मैं भी उसी हिम्मत से भरा हुआ पहुंच गया प्राणप्यारी के घर । वहीं से उसे फोन किया, उसने फोन उठाते ही शेरनी की तरह दहाड़ा "कितनी बार कहा है मम्मी घर पर होती हैं तो ऐसे फोन मत किया करो, पकड़े गए तो फोन छीन लेंगी । तुमको तो फर्क भी नही पड़ेगा हम तड़पते रह जाऐंगे ।" हमने भी तैश में आ कर एक डायलाॅग घुमा के मारा "उसी तड़प को खत्म करने आऐ हैं तुम्हारे सहर, तुम्हारे पप्पा से तुम्हारा हाथ मांगने ।" हमारी बात सुनते ही प्राणप्यारी ऐसे डर गईं जैसे समाजवाद कमल का फूल देख कर चुनाव के नतीजे सोच कर डर जाता । मगर हम काहे डरें ना हम समाजवाद हैं ना उसके पप्पा कमल का फूल फिर काहे का डर । सुना नही क्या प्यार किया तो डरना क्या ?
राजेश सिन्हा
अच्छी कहानी वो जिसे पढ़ कर चेहरे पर मुस्कान आ जाये। आपकी कहानी पढ़ कर आ गयी
Anil Akki
बहुत ही रोचक और जो प्यार भरी कहानी का एन्ड किया है बहुत ही लाजवाब ,,सुपर स्टोरी।
Reena Gaba
Wah... majedar Sapna... Sapna hakikat me Jarur badlega
रवि रंजन
वाह क्या खूब कही
शालिनी अग्रवाल
Shukr manayiye aap punjab ke kisi ghar mein na aa gaye... warna ek survey aapke liye karwana padta 😂😂
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