मैं पलाश चतुर्वेदी

मिताली सिंह

मैं पलाश  चतुर्वेदी
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सारांश

“मैं पलाश  चतुर्वेदी आज इन पत्तों को साक्षी मानकर तुम्हें अपनी पत्नी स्वीकार करता हूं ।“ “ये क्या बकवास है ?“ -कहते हुए मेघा ने तेजी से अपना हाथ पलाश  की हथेली से वापस खींचा । “अरे तुम्हें नही पता, ...
mukesh nagar
सच में जीवन में ऐसे मुखौटे पहने आदमी को पहचानना बेहद मुश्किल है। अच्छा लिखा आपने।👌👌
योगेश नारायण
कहानी ठीक ठाक है , लेकिन अंत भला तो सब भला वाली बात नही रही । अच्छी कोशिश की आपने, परिणाम औसत से कम रहा । षादी - शादी खुषी - खुशी ष - श इन शब्दों पर ध्यान दें ।
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Kiran sharma
good decision.buch gai megha
Sushil Singh
समय बहुत बलवान हाेता है
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