मैं जिन्दगी हूँ

पवन तिवारी

मैं जिन्दगी हूँ
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सारांश

तुम जो एक रात एक दिन रोज गुजार देते हो, वह मैं ही तो हूं. तुम्हारे धड़कते हुए हृदय में मैं ही तो हूं. मैं तो गुजरने के लिए ही हूं. पर कुछ कर गुजारो तो और बात है. मेरा आना हुआ है,तो जाना भी होगा. पर ...
Pradeep Kumar
बहुत खुब
Ashish Ranjan
Bahut hi sahi se aapne jindagi ke bare me likha hai
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नवीन श्रोत्रिय “उत्कर्ष
गजल नहीं है भाई ये, इसे नई कविता की श्रेणी में दर्ज करें ।
Ritu Verma
कितनी खूबसूरती से बयां किया है आपने ज़िन्दगी को... बेहतरीन अल्फाज़
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Deepak Dixit
वाह
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बहुत अच्छी रचना
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