मेहुल

जयति जैन "नूतन"

मेहुल
(47)
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सारांश

" कहा मर गयी, मुंहजली नाशमीटि... मेरे मेहुल को भड़काने वाली ! क्या बोल रही थी मेरे बच्चे से कि उसे घर से बाहर निकालने के लिये दूसरी शादी की मेरे बेटे ने ! सौतेली मां कभी सगी नहीं बन सकती ! खुद सौतेली है कमिनी खा गयी अपने पति की पहली औलाद को तो दूसरे को भी ऐसा ही समझती है , बाहर आ... " मुह्ल्लेवालो को फ्री मे तमाशा देखने मिल रहा था ! सीमा और मनन बडि मुश्किल से मां को मनाकर लाये ! मेहुल सब देख रहा था, तभी पडोसवाली रीता काकी आयी और मेहुल से बोली- अकसर सौतेली मां को लेकर हमारी धारणा गलत ही होती है ! क्युकि हमने हमेशा गलत पहलू को ही अपनी सोच का हिस्सा बना रखा है ! जबकि हर जगह एक जेसा नहीं है ! कुछ सौतेली मांये अच्छी हैं तो कुछ बुरी ! लेकिन हम और हमारा समाज उस मक्खी की तरह है, जो पूरा शरीर छोड़कर सिर्फ घाव पर ही बैठती है ! आज हम आस पास देखे तो पायेगे कि कुछ सौतेली मांये बलिदान की प्रतिमूर्ति हैं ! जिन्होने घर को संवारा, बच्चो को सम्भाला और बच्चे भी उन्हें अपनी सगी माँ की तरह ही मानते हैं ! लेकिन कुछ बुरी मांये भी हैं जिन्होने अपने सौतेलेपन से बच्चों की जिंदगी बर्बाद कर दी ! इसीलिये हम हमेशा बुरे लोगों को ही याद रखते हैं ! "
Bhawna Sharma
apne bache ke prati pyar our doosri biwi ke bache hone par wo hamare bacho ko pyar nhi karegi ye shak...... uske samne hi sab kuchh kah dena ki ye ma nhi ban sakti kabhi..... nhi pasand aaii to wapis chhor aayenge.... is it ok
Shiven Singh
मां?????????? समझ नहीं आ रहा है कि क्या लिखूं🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗🤗 बस एक आसूं गिर पड़ा 😊😊
Ravi Prakash
बेहतरीन कहानी।रूला दिया आपने तो।
Anju Chouhan
wah, bahut acchi story
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