मेहंदी

रुचिका मेहता

मेहंदी
(160)
पाठक संख्या − 12964
पढ़िए

सारांश

ऑटो में बैठते ही शरद बोला "तुम इतना लेट क्यों ? मेक- अप का शौक लग गया क्या ?", स्नेहा ने मुस्कुराते हुए कहा "नहीं, बुआ जी को मेहन्दी लगनी थी, उसी में देर हो गयी" "ओह्ह, मुझे ये मेहँदी की बू पसंद नही, ...
सगीर अहमद
अच्छी कहानी मगर ऐसा लगता है एक कविता के माध्यम से स्टोरी शोर्टकट में लिखी हुई है, अगर इसका विस्तार से वर्णन होता तो और भी अच्छी लगती
sumitra sharma
बहुत ही प्यारी रचना है
Hari Krishan
और थोड़ी बङी कहानी कर उददेश्य साफ होता तो अच्छा लगता
Riyaj Khan
bhut achhi hai mujhe bhut pasand hai 😊☺
DEEPAK KUMAWAT
nice yrr ase hi likhte raho ap bs end pr thora dhyan do ap yrr
सारी टिप्पणियाँ देखें
hindi@pratilipi.com
080 41710149
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें।
     

हमारे बारे में
हमारे साथ काम करें
गोपनीयता नीति
सेवा की शर्तें
© 2017 Nasadiya Tech. Pvt. Ltd.